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Sunday, 17 July 2016

NSG, NPT, MTCR, CTBT क्या है?

Unknown

NSG, NPT, MTCR, CTBT क्या है?
















NUCLEAR NON-PROLIFERATIONTREATY
     परमाणु अप्रसार संधि

  परमाणु अप्रसार संधि या एनपीटी परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है.
Øइसे जब 1968 मे बनाया गया तो इसका उद्देश्य था परमाणु हथियारों को उन पाँच देशों तक सीमित रखना जो यह स्वीकार करते थे कि उनके पास ऐसे हथियार हैं.
Øयह पाँच देश थे-अमरीका, सोवियत संघ (आज का रूस), चीन, ब्रिटेन और फ़्रांस.
Øहालाँकि चीन और फ़्रांस ने इस संधि पर 1992 तक हस्ताक्षर नहीं किए.
Øयह पाँच 'परमाणु हथियार संपन्न' राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं और इस संधि के तहत इस बात से बंधे हुए है कि यह 'ग़ैर-परमाणु' देशों को न तो यह हथियार देंगे और न ही इन्हें हासिल करने में उनकी मदद करेंगे.
 एजेंसी की निगरानी
Øअब तक कुल 191 देशों ने इस संधि पर दस्तख़त किए हैं और उनमें से कोई भी इससे बाहर नहीं निकला है.
Øपरमाणु ऊर्जा शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए विकसित कर सकते हैं. लेकिन वह भी वियेना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों की देखरेख में होगा.
संधि से अलग
§भारत, पाकिस्तान और इसराइल ने इस पर दस्तख़त नही किए हैं और समझा जाता है कि उनके पास परमाणु क्षमता है.
§भारत लंबे समय से इस परमाणु एकाधिकार की आलोचना करता आ रहा है और 1974 में उसने, जैसाकि सरकार का कहना था, शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण किया.
§§इस संधि की कई उपलब्धियाँ रहीं. दक्षिण अफ्रीका और लगभग समूचे लातिन अमरीका ने परमाणु हथियार से संबद्ध सभी गतिविधयों का त्याग कर दिया है.
§दक्षिण अफ्रीका ने 1980 के दशक में गुप्त रूप से हथियार बनाए लेकिन 1991 में उसने उन्हें नष्ट कर दिया और वह एनपीटी का सदस्य बन गया.
§उसी वर्ष खाड़ी युद्ध के बाद परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पाया कि इराक़ इस संधि का उल्लंघन कर रहा है.
§इस समय तक निरीक्षकों को केवल वहीं जाने का अधिकार था जिन स्थानों के बारे में संधि पर हस्ताक्षर करने वालों ने ख़ुद बताया था.
§लेकिन इराक़ की स्थिति सामने आने के बाद इसके अधिकार बढ़ा दिए गए.
§और इन नए अधिकारों की वजह से ही 1993 में उत्तर कोरिया के साथ यह संकट पैदा हुआ.
§इस कम्युनिस्ट राष्ट्र ने, जिसने 1985 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, अब धमकी दी कि वह इससे बाहर हो जाएगा.
§NPT पर क्यों हस्ताक्षर नही करना चाहता भारत ?
भारत यदि एनपीटी पर हस्ताक्षर करता है तो उसे अपने पास उपलब्ध सभी परमाणु हथियार और परमाणु तकनीक छोड़ने पड़ेंगे। साथ हीCTBT की शर्तानुसार वह भविष्य में परमाणु परिक्षण भी नही कर पायेगा। अपने पड़ोसी देशो से लगातार बढ़ रहे कलह और प्रतिद्वंदिता और अशांत व्यवहार के चलते भारत इस तरह के कदम उठाने से पीछे हट रहा है।

NUCLEAR SUPPLIERS GROUP

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह


§क्या है एनएसजी?  भारत के पहले परमाणु परीक्षण के जवाब में NSG सन् 1974 मेंस्‍थापना हुई। यह 48 देशों का अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और सदस्य देशों द्वारा मिलकर परमाणु संयंत्र के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन कार्य पर जोर देना है. परमाणु सामग्री की केवल शांतिपूर्ण काम के लिए आपूर्ति की जाती है.    इसमें विश्व के 48 देश शामिल है, जिसमें से 43देश NPT पर हस्ताक्षर कर चुके है। भारत नेNPT पर हस्ताक्षर नही किये है। इसी वजह से NSG में भारत की सदस्यता का विरोध चीन,आयरलैंड और तुर्की जैसे देश कर रहे हैं ।जबकि इसमें शामिल एक देश ऐसा भी है जिसनेNPT पर हस्ताक्षर नहीं किये है लेकिन फिर भी फ़्रांस को Nuclear Suppliers Groupसमूह में शामिल कर लिया गया |      एनएसजी में शामिल होने को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा था कि फ्रांस बिना एनपीटी साइन किए एनएसजी का सदस्य बना था। इस पर चीन भारत के रुख को खारिज करते हुए कहा था कि फ्रांस एनएसजी का संस्थापक सदस्य है और ऐसे में उसकी सदस्यता को स्वीकार किए जाने का सवाल कहां पैदा होता है।
§NSG सदस्यता के क्या है फायदे ?
न्यूक्लियर मेडिसिन व न्यूक्लियर पावर प्लांट लगानें की तकनीक मिल पाएगी।
§भारत परमाणु से जुड़ी सारी तकनीक और यूरेनियम सदस्य देशों से बिना किसी समझौते के हासिल कर सकेगा. इससे भारत में विकास दर में खासी बढ़ोतरी होगी। साथ ही भारत की ऊर्जा जरूरते पूरी होगी।
§भारत में दुनिया का हर छठा व्यक्ति रहता है. लेकिन दुनिया के कुल उर्जा उत्पादन का महज 2 से 3 फीसदी यहां पैदा होता है भारत अपनी जरुरत का 40% ईंधन स्वच्छ व दोबारा इस्तेमाल की जानें वाली न्यूक्लियर तकनीक से हासिल कर पायेगा। साथ ही जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में भी कमी आएगी।
§आधुनिक परमाणु तकनीक मिलनें पर भारत भी न्यूक्लियर पावर इक्विप्मेंट का व्यवसायीकरण कर सकेगा।
§भारत, दूसरें देशों जैसे श्रीलंका व बांग्लादेश को शांतिपूर्ण कामों के लिए परमाणु तकनीक बेच सकेगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
§वीटो का इस्तेमाल वह नए सदस्य को ग्रुप में शामिल करने के लिए कर सकते हैं.
§सदस्य बनने के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय साख में वृद्धि होगी.
§देश मे मौजूदा वक्त में शहरीकरण बढ़ा है जिसके बढ़ने के बाद लोगों को ऊर्जा की खपत की जरुरतों को पूरा करने में यह राह कारगर साबित होगा. भारत के ऊर्जा संकट को खत्म करने और तरक्क़ी की तरफ जाने का यह एक सफल प्रयोग साबित होगा और अब तक भविष्य को लेकर इसकी जो समस्यायें थी, इस संगठन से जुड़कर उसपर निजात पाया जा सकता है.
§भारत ने अमेरिका और फ्रांस के साथ परमाणु करार किया है। ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ परमाणु करार की बातचीत चल रही है। फ्रांसीसी परमाणु कंपनी अरेवा जैतापुर, महाराष्ट्र में परमाणु बिजली संयंत्र लगा रही है। वहीं अमेरिकी कंपनियां गुजरात के मिठी वर्डी और आंध्र प्रदेश के कोवाडा में संयंत्र लगाने की तैयारी में है। परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करने में भी सदस्य राष्ट्रों से मदद मिलेगी।
§जब 1974 में यह ग्रुप बना था तब इसमे महज 7 देश थे – कनाडा, पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और अमेरिका. बाकी देशों को धीरे-धीरे इस ग्रुप में जगह मिलती रही है.
§वर्तमान सदस्य देश हैं ARGENTINA, AUSTRALIA, AUSTRIA, BELARUS, BELGIUM, BRAZIL, BULGARIA, CANADA, CHINA, CROATIA, CYPRUS, CZECH REPUBLIC, DENMARK, ESTONIA, FINLAND, FRANCE, GERMANY, GREECE, HUNGARY, ICELAND, IRELAND, ITALY, JAPAN, KAZAKHSTAN, REPUBLIC OF KOREA, LATVIA, LITHUANIA, LUXEMBOURG, MALTA, MEXICO, NETHERLANDS, NEW ZEALAND, NORWAY, POLAND, PORTUGAL, ROMANIA, RUSSIAN FEDERATION, SERBIA, SLOVAKIA, SLOVENIA, SOUTH AFRICA, SPAIN, SWEDEN, SWITZERLAND, TURKEY, UKRAINE, UNITED KINGDOM, and UNITED STATES


MISILE TECHNOLOGYCONTROL REGIME

मिसाइल टेक्नोलॉजीकण्ट्रोल


रेजिम

§क्या है MTCR?
एमटीसीआर अप्रैल 1987 में गठित 35 देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका काम दुनिया भर में मिसाइल या मानवरहित हथियार द्वारा रासायनिक, जैविक, नाभिकीय हथियारों के प्रसार पर नियंत्रण रखना है. हालांकि इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग कोई भी देश केवल अपनी सुरक्षा के लिए कर सकता है.
  एमटीसीआर अपने सदस्यों से अनुरोध करती है कि वह अपने मिसाइल निर्यात और 500 किग्राभार कम से कम 300 किमी तक ले जाने में सक्षम या सामूहिक विनाश के किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति करने में सक्षम संबंधित प्रौद्योगिकी को सीमित करें।
§भारत इसका 35 वां सदस्य बना,चीन और पाकिस्तान नहीं हैं सदस्य
§एमटीसीआर का सदस्य होने का मतलब एमटीसीआर में शामिल होने के बाद भारत को अपनी मिसाइल तकनीक व प्रक्षेपण से जुड़ी हर जानकारी सदस्य देशों को देनी होगी. सदस्य बनने के बाद भारत के लिए दूसरे देशों से मिसाइल तकनीक हासिल करना आसान हो जाएगा लेकिन अगर भारत किसी दूसरे देश को इस तरह की कोई तकनीक बेचता है या उसका कारोबार करता है तो उसकी पूरी जानकारी सभी सदस्य देशों को देनी होगी.
MTCR से भारत को फ़ायदा
1. भारत अमेरिका से मानवरहित ड्रोन ख़रीद पाएगा ये वही विमान हैं जिनका अमेरिका इस समय उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामिक आतंकियों के खात्मे में इस्तेमाल कर रहा है।
2. अमेरिका से ख़रीद सकता है प्रिडेटर ड्रोन
3. ब्रह्मोस जैसी मिसाइल बेच सकेगा
4. 
NSG में भारत के दावे को मज़बूती         5.भारत उच्‍चस्‍तरीय मिसाइल तकनीक खरीद सकेगा।                         6. भारत अभी रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइज ‘ब्रहमोस’ बनाता है ताकि उसे अन्‍य देशों को बेचा जा सके।      7. मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा
§MTCR का सदस्‍य बनने पर भारत को कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा जैसे अधिकतम 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइल बनाना, ताकि हथियारों की होड़ को रोका जा सके।


COMPREHENSIVE TEST BAN TREATY

व्यापक परमाणुपरीक्षण 

प्रतिबंध संधि


  CTBT परमाणु परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करती है,
§संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा के द्वारा 10 सितंबर, 1996 को पारित हुई। 24 सितंबर, 1996 से इस संधि पर हस्ताक्षर शुरू हुए तथा संयुक्त राज्य अमेरिका इस पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश बना, यद्यपि इसने अभी तक इसे अनुमोदित नहीं किया है।
§सीटीबीटी को प्रभाव में लाने के लिये उन सभी 44 देशों की संधि पर हस्ताक्षर करना तथा उसे अनुमोदित करना आवश्यक है, जिनके पास नाभिकीय रिएक्टर हैं (अनुच्छेद IV)। इन 44 देशों में भारत, पाकिस्तान और इजरायल भी सम्मिलित हैं। संधि के अनुसार अगर हस्ताक्षर कार्यक्रम प्रारंभ होने के 3 वर्षों के भीतर सभी नाभिकीय रिएक्टर संपन्न देश संधि को अनुमोदित नहीं करते हैं, तो सीटीबीटी संगठन. सदस्य देशों का सम्मेलन (सीओएसपी) आयोजित करेगा। सीओएसपी का आयोजन उन देशों के आग्रह पर होगा, जिन्होंने पहले ही अनुमोदन-प्रपत्र प्रस्तुत कर दिया है। लेकिन निर्धारित समय-सीमा, अर्थात् 24 सिंतबर 1999, तक इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं हुई, क्योंकि तब तक मात्र 26 देशों ने ही संधि पर हस्ताक्षर करके उसे अनुमोदित किया था।
§जनवरी 1994 में जेनेवा में आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन (सीडी) में परमाणु परीक्षण के प्रतिबंध पर चर्चा शुरू हुई [यद्यपि सीडी ( 1979 ) संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र महासभा का सहायक अंग नहीं है, तथापि, यह उससे घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है] भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका सीडी के मूल सह-प्रायोजकों में थे। मई 1995 में एनपीटी के स्थायी और अनिश्चित विस्तार के बाद कुछ सदस्यों, विशेषकर भारत, ने सीटीबीटी पर हस्ताक्षर को पूर्ण निरस्त्रीकरण की समयबद्ध योजना के साथ जोड़ दिया है। ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि एनपीटी निरस्त्रीकरण से निपटने में सफल नहीं हुई, जो कि इसके मौलिक लक्ष्यों में से एक है। इसके दो अन्य लक्ष्य हैं-परमाणु अप्रसार और नाभिकीय ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग।
§दो वर्षों तक चली सघन वार्ताओं के बाद 20 अगस्त, 1996 को सीडी सम्पन्न हुआ। चर्चा के दौरान सीटीबीटी के अनेक प्रावधानों पर विरोध व्यक्त किया गया। प्रारूप-पत्र (draft text) के प्रावधानों पर सहमति के अभाव में सीडी के पास महासभा की सिफारिश करने के लिये कोई दस्तावेज नहीं था। लेकिन सीडी में अवरुद्ध किये गये प्रारूप पर संयुक्त राष्ट्र संघ की मुहर लगाने के लिए प्रारूप को सूचना दस्तावेज(information document) के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिस पर आस्ट्रेलिया ने 120 देशों के समर्थन के साथ एक प्रस्ताव जारी किया, जिसमें महासभा से दस्तावेज के स्वीकार करने के लिये तथा महासचिव से उसे सदस्य देशों के द्वारा हस्ताक्षर के लिये खोलने का आग्रह किया गया। इस प्रकार अवरुद्ध सीटीबीटी संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रम में सम्मिलित हो गया। इस प्रक्रिया में सीडी की 17 वर्ष पुरानी कार्यप्रणाली की सम्पूर्ण व्यवस्था आम सहमति से समाप्त हो गई।
  सीटीबीटी के कुछ प्रावधान निम्नांकित हैं-
§संधि सभी प्रकार के परमाणु अस्त्र परीक्षण विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाती है।
§संधि का उल्लंघन रोकने के लिये एक अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण प्रणाली स्थापित की जाएगी।
§1,000 टन क्षमता वाले परम्परागत विस्फोटों से अधिक शक्तिशाली विस्फोट (भूमिगत, वायुमंडल या अंतर्जलीय) का पता लगाने के लिये 20 स्टेशनों वाला एक नेटवर्क स्थापित किया जायेगा।
§अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण प्रणाली या किसी विशेष देश की निगरानी (लेकिन जासूसी नहीं) से प्राप्त सूचना के आधार पर कोई भी देश विस्फोट की सत्यता स्थापित करने के लिये निरीक्षण का आग्रह कर सकता है। निरीक्षण के आवेदन के लिये 51 सदस्यीय कार्यकारी परिषद के 30 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है 
§जब तक अनुच्छेद 2 में निर्दिष्ट सम्मेलन या ऐसा कोई अन्य सम्मेलन कोई अन्यथा निर्णय नहीं लेता है, तब तक यह प्रक्रिया हस्ताक्षर अभियान शुरू होने की प्रत्येक वर्षगांठ पर दुहरायी जायेगी और तब तक जारी रहेगी जब तक यह संधि प्रभावी नहीं हो जाती है।
§§सीटीबीटी संगठन ने 27 अक्टूबर, 1999 को विएना में सीओएसपी का आयोजन किया। इसने विएना घोषणा को अपनाया, जो संधि को अनुमोदित करने वाले 26 देशों के द्वारा शीर्षतम राजनीतिक स्तर पर प्रगतिशील सहयोग प्रपत्र की आशा करता है। अधिकांश सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि संधि को प्रभाव में लाने के लिये सीओएसपी की पुनः आवश्यकता नहीं होगी। सर्वसम्मति से अपनाई गई विएना घोषणा का श्रेय जापान और इंग्लैण्ड के एक वर्ष के अथक प्रयास को जाता है। घोषणा ने संधि को अनुमोदित करने वाले 26 देशों की ओर से अन्य 18 देशों से आग्रह किया कि वे शीघ्रातिशीघ्र संधि पर हस्ताक्षर करें तथा उसका अनुमोदन करें। इसने पाकिस्तान और भारत को भी प्रेरित किया कि वे संधि को प्रभाव में लाने में बाधक न होने का अपना वचन पूरा करें। तीन परमाणु सम्पन्न देशों, जिन्होंने संधि की अनुमोदित नहीं किया था, से भी अनुमोदन की प्रक्रिया में गति लाने के लिये कहा गया।
 सीटीबीटी की कुछ प्रमुख त्रुटियां है-
§पांच परमाणु हथियार-सम्पन्न देशों द्वारा सभी परमाणु अस्त्रों को नष्ट करने के संबंध में कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है (भारत ने दस वर्षीय समय-सीमा का सुझाव दिया);
§ईआईएफ धारा अस्वीकार्य है;
§पांच परमाणु हथियार-सम्पन्न देशों को स्पष्ट रूप से लाभ की स्थिति में रखा गया है क्योंकि संधि से अलग होने की स्थिति में वे अपने हथियारों का आध्रुनिकीकरण कर सकते हैं;
§संधि के अंतर्गत कोई भी सदस्य देश अन्य सदस्यों के समर्थन के बिना भी संधि से अलग हो सकता है तथा पांच परमाणु-सम्पन्न देश अपने डिजाइन दल और प्रयोगशालाओं को जारी रख सकते हैं;
§संधि व्यापक नहीं है, यह मात्र नाभिकीय अस्त्र परीक्षण पर प्रतिबंध लगाती है; सदस्य देश कम्प्यूटर-अनुरूपित परीक्षणों के माध्यम से अपनी शस्त्र प्रणाली को और सम्पन्न बना सकते हैं;
§अध:विवेचनात्मक परीक्षणों (subcritical tests) को बहुत अस्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है,
§संधि के प्रभावी होने के बाद उसका उल्लंघन करने वाले सदस्यों को दण्डित करने की प्रक्रिया भी दोषपूर्ण है।



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Saturday, 16 July 2016

राहें विकास की : छत्तीसगढ़ शासन की समस्त योजनायें

Unknown


राहें विकास की : छत्तीसगढ़ शासन की समस्त योजनायें


राहें विकास की : छत्तीसगढ़ शासन की समस्त कल्याणकारी योजनाओं का संग्रह, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक



छत्तीसगढ़ का वार्षिक बजट 2016-17 एक नजर में ( Chhattisgarh : Annual Budget 2016-17 at a glance )

Unknown

छत्तीसगढ़ का वार्षिक बजट 2016-17
एक नजर में

(राशि करोड़ में)
मद  2015-16 (पुनरीक्षित अनुमान)2016-17 (बजट अनुमान)
कुल आय65,814         69,972
कुल व्यय65,89870,059
सकल वित्तीय घाटा 6,832  
8,111
(सकल घरेलू उत्पाद का  2.88 प्रतिशत)

क्षेत्रवार व्यय: पूंजीगत व्यय में 18 प्रतिशत वृद्धि
आयोजना व्यय42,056  (60 प्रतिशत)
पूंजीगत व्यय  13,004 (18.5 प्रतिशत)

उपयोजना व्यय
अनुसूचित जनजाति उपयोजना व्यय   36 प्रतिशत
अनुसूचित जाति उपयोजना व्यय    12 प्रतिशत

सामाजिक क्षेत्र में व्यय का प्रावधान - 40 प्रतिशत

स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास
13,086 करोड़ (19 प्रतिशत)
स्वास्थ्य  3,815 करोड़ (5.4 प्रतिशत)
महिला एवं बाल विकास  1,902 करोड़ (2.7 प्रतिशत)
 
आर्थिक क्षेत्र पर व्यय - 40 प्रतिशत
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति4,627 करोड़ (6.6 प्रतिशत)
ग्रामीण विकास   8,319 करोड़ (12 प्रतिशत)

लोक निर्माण
6,804 करोड़ (10 प्रतिशत)
सिंचाई2,923 करोड़ (4 प्रतिशत)

वित्तीय संकेतक
वित्तीय संकेतक
   चौदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा
2016-17 बजट अनुमान
राजस्व घाटा
   शून्य
  5,037 करोड़ (राजस्व आधिक्य)
वित्तीय घाटा (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)3 प्रतिशत2.88 प्रतिशत
कुल ऋण भार (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)
    25 प्रतिशत
   16.31 प्रतिशत
      
वित्तीय प्रबंधन
वित्तीय संकेतक   छत्तीसगढ़   गैर विशेष राज्यों का औसत
विकासमूलक व्यय (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)21.4 प्रतिशत
(प्रथम)
   13 प्रतिशत
सामाजिक क्षेत्र पर व्यय (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)14.7 प्रतिशत
(द्वितीय)
   8.5 प्रतिशत

पूंजीगत व्यय (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)
     4 प्रतिशत
(पांचवा)
   2.9 प्रतिशत
कर राजस्व (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)  8.5 प्रतिशत
(छठवां)
  7.7 प्रतिशत
गैर कर राजस्व (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)   15.2 प्रतिशत
(तृतीय)
   1.4 प्रतिशत
ब्याज भुगतान (जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत के रूप में)  0.9 प्रतिशत
(प्रथम)
   1.7 प्रतिशत

 वर्ष 2016-17 बजट के मुख्य आकर्षण


किसानों के लिए
  •     कृषि विभाग के बजट में 450 करोड़ (26 प्रतिशत) की वृद्धि
  •   ब्याज अनुदान एवं सूखे के लिए किसानों को ऋण सहायता - 223 करोड़
  •    सूखा-प्रभावित लघु एवं सीमांत किसानों को 1 क्विंटल तक निःशुल्क प्रमाणित धान बीज - 150 करोड़
  •     सूखा-प्रभावित किसानों को बेटियों के विवाह हेतु 30 हजार - 8 करोड़
  •     प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना - 200 करोड़
  •     पंडरिया शक्कर कारखाने हेतु अंशपूंजी - 28 करोड़
  •     खसरा-बी1 आदि भू-अभिलेख ऑनलाईन हेतु ई-धरती योजना - 69 करोड़
  •     250 नवीन कृषि यंत्र सेवा केन्द्र - 15 करोड़
  •     सिंचाई परियोजनायें - 2 हजार 564 करोड़
  •     अरपा भैंसाझार सिंचाई परियोजना - 169 करोड़
  •     महानदी परियोजना समूह की नहरों हेतु - 163 करोड़
  •     सोंढूर सिंचाई परियोजना - 49 करोड़
  •     केलो सिंचाई परियोजना - 47 करोड़
  •     मोंगरा बैराज फेज-2 सिंचाई परियोजना - 43 करोड़
  •     23 हजार कृषि पंपों का ऊर्जीकरण - 243 करोड़
अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लिए
  •     39 स्कूलों का हायर सेकेण्डरी में तथा 30 स्कूलों का हाईस्कूलों में उन्नयन
  •     आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों के छात्रों के लिए स्वामी विवेकानंद गुरूकुल उन्नयन योजना प्रारंभ - 119 करोड़
  •     राज्य के सभी 201 भवनविहीन आश्रम शालाओं के लिए 2 वर्ष में भवन - इस बजट में 47 स्वीकृत
  •     शिष्यवृत्ति की दर बढ़ाकर 850 रुपये प्रतिमाह
  •     सभी विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को रेडियो, छाता व कम्बल
  •     संरक्षित वन क्षेत्रों के 23 हजार परिवारों को तेंदूपत्ता संग्रहण की क्षतिपूर्ति के लिए 2 हजार रुपये प्रति परिवार
  •     जगदलपुर और मुंगेली में क्रीड़ा परिसर
  •     राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव
  •     175 विशेष पिछड़ी जनजाति गांवों में पेयजल - 3 करोड़ 50 लाख
बस्तर-सरगुजा क्षेत्र के लिये
  •    जगदलपुर में ट्रॉमा सेंटर से युक्त 100 बिस्तर अस्पताल
  •     एन.एम.डी.सी. के सहयोग से 100 बिस्तर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल
  •     जिला अस्पताल, कांकेर के 100 बिस्तर का 200 बिस्तर में उन्नयन
  •     सी.एस.आर. से सुकमा एवं बीजापुर में एजुकेशन सिटी की स्थापना
  •     बस्तानार, उदयपुर, लुण्ड्रा और कांसाबेल में आई.टी.आई. की स्थापना
  •     बस्तर एवं सरगुजा विश्वविद्यालयों को भवन - 20 करोड़
  •     बीजापुर, रामानुजगंज, चारामा व भैरमगढ़ में नगरीय जल प्रदाय योजनायें
  •     4 हजार और पंपों का ऊर्जीकरण
  •     लो वोल्टेज समस्या को हल करने और बढ़ती मांग की पूर्ति हेतु 700 करोड़ की लागत से 80 सबस्टेशन दो वर्षों में
  •     जगदलपुर हवाईपट्टी को विकसित करने हेतु 23 करोड़
संचार
  •     42 हजार करोड़ के निवेश से आगामी तीन वर्षों में 13 हजार किलोमीटर सड़कों का उन्नयन
  •     पी.डब्ल्यू.डी. सड़कों व पुलों के लिये 4 हजार 640 करोड़ (2015-16 से 56 प्रतिशत अधिक)
  •     सड़कों हेतु कुल 6 हजार 101 करोड़
  •     1 हजार 300 किलोमीटर से अधिक रेल नेटवर्क मात्र 5-6 वर्षों में निर्मित करने की योजना
  •     रायपुर-बलौदाबाजार-झारसुगुड़ा, अंबिकापुर-बरवाडीह एवं डोंगरगढ़-कवर्धा- मुंगेली-बिलासपुर-कटघोरा रेल लाईनों को विकसित करने की योजना - कुल 780 किलोमीटर
  •     रायगढ़ की हवाईपट्टी का विमानतल में उन्नयन - 80 करोड़
  •     रायपुर से केन्द्री छोटी लाईन की भूमि को रेलवे से प्राप्त कर रायपुर नगर में सड़क और एयरपोर्ट व नया रायपुर तक सार्वजनिक यातायात सेवायें - 139 करोड़
  •     नया रायपुर में बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम हेतु बसों के क्रय और संचालन के लिये 15 करोड़
महिलाओं एवं बच्चों के लिये सुविधायें  
  •     महतारी जतन योजना घोषित - गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रतिदिन एक बार पका हुआ भोजन - 25 करोड़
  •     मुख्य मंत्री अमृत योजना घोषित - बच्चों को सप्ताह में एक बार दूध प्रदाय - आंगनबाड़ियों में सुगन्धित मीठा दूध देने के लिए 25 करोड़ तथा बस्तर, कबीरधाम एवं बालोद जिलों में आठवीं कक्षा तक सोया दूध
  •     647 स्वास्थ्य केन्द्रों में 24 घंटे प्रसव की सुविधा
  •     महिलाओं एवं बच्चों के विकास हेतु आगामी वर्ष में 1 हजार 902 करोड़ का प्रावधान है, जो चालू बजट के प्रावधान से 118 करोड़ अधिक - एकीकृत बाल विकास योजना हेतु 1 हजार 56 करोड़
स्वास्थ्य
  •     मुख्य मंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना अंतर्गत बीमा कवर की राशि 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार - पत्रकारों को इसके अलावा 20 हजार का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर - 60 करोड़
  •     राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को 30 हजार का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर
  •     अस्पतालों में 2 हजार 400 नई बिस्तर क्षमता का निर्माण कर, बिस्तर क्षमता में 44 प्रतिशत की वृद्धि - जिला अस्पताल दुर्ग 400 बिस्तर से 500 बिस्तर - 4 जिला अस्पतालों को 100 बिस्तर से 200 बिस्तर - रायगढ़ और राजनांदगांव जिलों में नये 100 बिस्तर जिला अस्पताल - 7 स्थानों में नये 100 बिस्तर सिविल अस्पताल - 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का 30 बिस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उन्नयन
  •     भर्ती मरीजों के भोजन की दर 60 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 100 रुपये
  •     दाऊ कल्याण सिंह अस्पताल परिसर में न्यूरोसर्जरी, नेफ्रॉलजी, प्लास्टिक सर्जरी और पिडियाट्रिक सर्जरी सुपरस्पेशलिटी सुविधायें - च्म्ज् स्कैन की नई सुविधा
  •     सिम्स, बिलासपुर का नवीन भवन निर्माण
  •     स्वच्छ भारत हेतु 700 करोड़ - नगरीय क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिये राज्य के बजट से प्रावधान कर सब्सिडी दुगुनी
  •     525 करोड़ लागत की 8 नवीन ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजनाएं
  •     16 नगर पंचायतों के लिये 200 करोड़ लागत से नगरीय जल प्रदाय योजनाएं
पुलिस
  •     सुरक्षा बलों को और सशक्त करने के लिए 4 नये बटालियन गठित 4 हजार पदों का प्रावधान है, जिनमें से 3 हजार पदों पर भर्ती राज्य के अत्यंत नक्सल-प्रभावित जिलों से
  •     सुरक्षाकर्मियों के लिए 1 हजार करोड़ की लागत से 2 वर्ष में 10 हजार आवास
  •     पुलिस स्थापना हेतु 1 हजार पद का
  • युवाओं एवं उद्यमियों हेतु सुविधायें
  •     छत्तीसगढ़ युवा क्रांति योजना मेें 74 हजार छात्रों को लैपटॉप एवं टेबलेट - 80 करोड़
  •     ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी 4 राज्यों में - आने वाले वर्ष में अनेक और सुधार
  •    नया रायपुर में सम्मेलनों एवं प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए कन्वेंशन सेंटर, निर्यात फेसिलिटेशन सेंटर तथा शिल्प ग्राम सहित आवश्यक अधोसंरचना के लिये 25 करोड़
  •     इन्क्यूबेटर-सह-ऐक्सेलरेटर व स्टार्ट-अप उद्यमियों को ब्याजमुक्त ऋण तथा वेंचर कैपिटल देने के लिये 10.2 करोड़
  •     मुख्य मंत्री युवा स्वावलंबन योजना - छात्रों का आई. टी. तथा बी.पी.ओ. के लिये कौशल विकास एवं प्लेसमेंट
  •     8 नवीन आई.टी.आई. की स्थापना - आई.टी.आई. सीटों की संख्या में 1 हजार 136 सीटों की वृद्धि
  •     ट्रिपल आईटी सीटों में वृद्धि - 80 से बढ़ाकर 120 - ट्रिपल आईटी के के लिये बजट में 10 करोड़ तथा उद्योग की सहभागिता से 82 करोड़
  •    शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, रायपुर में सिविल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
 शिक्षा
  •     80 हाईस्कूलों का हायर सेकेण्डरी स्कूलों में, 100 मिडिल स्कूलों का हाईस्कूलों में तथा 15 प्राथमिक स्कूलों का मिडिल स्कूलों में उन्नयन
  •     शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों के नियमित रूप से वेतन भुगतान हेतु जिला स्तर से सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था
  •     18 से 23 वर्ष आयु-समूह में उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्रों का अनुपात वर्ष 2003-04 की तुलना में 5 गुना
  •     उच्च शिक्षा में सुधार के लिये स्वामी विवेकानंद ज्ञानदीप योजना - 84 करोड़
  •     14 स्नातक महाविद्यालयों को स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में उन्नयन
  •     62 स्नातक महाविद्यालयों में नवीन पाठ्यक्रम
  •     बिलासपुर एवं दुर्ग विश्वविद्यालयों को 20-20 करोड़ भवन हेतु
  •     पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, इंदिरा संगीत विश्वविद्यालय एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को 20-20 करोड़ क्षमता विस्तार व उन्नयन हेतु
आवास
  •     ’’2022 तक सबके लिये आवास’’ मिशन में सभी राज्यों में छत्तीसगढ़ द्वारा सबसे पहले निर्माण प्रारंभ - 26 हजार आवास निर्मित करने का लक्ष्य - 1 हजार 900 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत
  •     प्रधान मंत्री आवास योजना अंतर्गत वर्तमान में प्रावधानित 1 लाख के शासकीय अनुदान के अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा गंदी बस्तियों में निवासरत हितग्राहियों को प्रति आवास 4 लाख तक का अनुदान - ढाई हजार आवासों के लिये 100 करोड़ सहित मिशन के लिये 400 करोड़
विद्युत
  •    दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत सभी 818 अविद्युतीकृत ग्रामों को मार्च 2017 तक विद्युतीकृत करने का लक्ष्य - 5 हजार 344 अविद्युतीकृत बसाहटों को मार्च 2018 तक विद्युतीकृत करने का लक्ष्य - 761 करोड़ की लागत के इन कार्यों के लिये बजट में राज्यांश के रूप में 155 करोड़
  •     राज्य के सभी स्कूलों को मार्च 2017 तक, तथा सभी आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य केन्द्रों को मार्च 2018 तक, विद्युतीकृत करने की कार्ययोजना - 8 हजार स्कूल, 19 हजार आंगनबाड़ियां और 823 अविद्युतीकृत स्वास्थ्य केन्द्र विद्युतीकृत होंगे - 30 करोड़ का प्रावधान
गांवों के लिये सुविधायें
  •     रूर्बन मिशन अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों की तरह विकास - राजनांदगांव, धमतरी, कबीरधाम एवं बस्तर जिले में 4 क्लस्टर - 40 करोड़ प्रावधान
  •     मुख्य मंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना - 570 करोड़
  •     ग्रामीण बी.पी.एल. परिवारों को दिवंगत स्वजनों का अंतिम संस्कार सामाजिक रीतियों के अनुसार सम्मानपूर्वक करने में सहायता के लिए श्रद्धांजलि योजना - 2 हजार रुपये सहायता राशि - 10 करोड़ का प्रावधान
  •     2 हजार से अधिक आबादी के गांवों का आंतरिक विद्युतीकरण - 50 करोड़
नगरीय विकास
  •     1 लाख से अधिक जनसंख्या के नगरों हेतु अमृत मिशन अंतर्गत शत-प्रतिशत स्वच्छ पेयजल कनेक्शन, सीवरेज व्यवस्था तथा उद्यान विकास - रायपुर में 650 करोड़ की सीवरेज परियोजना स्वीकृत - मिशन हेतु 225 करोड़
  •     नया रायपुर के सीवरेज सिस्टम हेतु 70 करोड़ के ब्याज-रहित ऋण का प्रावधान
  •     10 नगरों - रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़, अंबिकापुर, जगदलपुर, कवर्धा और जांजगीर - में इस वर्ष फायर स्टेशन
खेल एवं संस्कृति
  •     रायपुर में एशियन वॉलीबॉल चैम्पियनशिप आयोजन (सितंबर 2016) - 1 करोड
  •     आधारभूत खेल अधोसंरचना के विकास के लिए 45 लाख प्रति स्टेडियम की लागत से 22 मिनी स्टेडियमों के निर्माण हेतु प्रावधान
  •     सिन्धु दर्शन के लिये आर्थिक सहायता
  •     सिरपुर के सांस्कृतिक विकास हेतु 1 करोड़ 50 लाख
  •     डोंगरगढ़ एवं रतनपुर में पर्यटकों के ठहरने की सुविधायें
प्रशासनिक अधोसंरचना
  •     पांचों संभागीय मुख्यालयों में कुल 117 करोड़ की लागत के ऑडिटोरियम निर्माण हेतु 5 करोड़ 70 लाख
  •     दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर में 12 करोड़ की लागत से शासकीय सेवकों के ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण के लिए 1 करोड़ 20 लाख
  •     जगदलपुर में शासकीय आवास निर्माण हेतु 5 करोड़
श्रमिक एवं निःशक्तजन कल्याण
  •    असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा मंडल 40 करोड़ का प्रावधान - लगभग 4 लाख हितग्राही लाभान्वित करने का लक्ष्य
  •     निःशक्तजनों की प्रतिभाओं के विकास में सहयोग के लिये ’’क्षितिज अपार संभावनायें’’ अभियान अंतर्गत 5 नई योजनाओं तथा विशेष पहलों के लिये 3 करोड़ 75 लाख
  •     निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना में प्रोत्साहन राशि 21 हजार सेे बढ़ाकर 50 हजार - दोनों नवविवाहित निःशक्त होने पर राशि 1 लाख
कर राहत एवं सुधार
आम उपभोक्ताओं को राहत के लिये
  •     सायकल तथा सायकल पार्ट्स पर प्रचलित 5 प्रतिशत वैट समाप्त किया जाकर इसे करमुक्त किया जाएगा।
  •    ऑनलाईन व्यापार से राज्य के व्यापार को हो रहे नुकसान से राहत देने के लिए मोबाईल फोन पर वैट की दर 14 से घटाकर 5 प्रतिशत
  •     स्वच्छ भारत अभियान की सफलता तथा सफाई की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने हेतु सफाई के लिए उपयोग किए जाने वाले झाडू, पोछा (मॉप), ब्रश तथा वाइपर वैट से मुक्त
  •     इडली तथा डोसा के घोल (बैटर) पर प्रचलित 14 प्रतिशत वैट समाप्त किया जाकर करमुक्त
  • उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए
  •    राज्य के स्टील उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आयरन ओर, पिग आयरन, स्पंज आयरन, आयरन ओर पैलेट, इंगट, बिलेट तथा फेरो-एलॉयज पर वैट की सामान्य दर 5 से घटाकर 2 प्रतिशत
  •     छत्तीसगढ़ में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में उत्पादित डेयरी उत्पाद घी, पनीर एवं खोवा पर प्रचलित 5 प्रतिशत वैट समाप्त किया जाकर करमुक्त
  •     वायर नेल पर वैट की दर 14 से घटाकर 5 प्रतिशत
  •     इलेक्ट्रो-फोर्ज्ड ग्रेटिंग पर केन्द्रीय विक्रय कर की दर 2 से घटाकर 1 प्रतिशत
कर सुधार
  •     सेल्फ-असेसमेंट के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले वार्षिक फॉर्म में त्रुटि होने पर एक बार रिवाईज किए जाने की सुविधा
  •     विलंब से कर जमा करने पर ब्याज की डेढ़ और ढाई प्रतिशत की दो दरों के स्थान पर डेढ़ प्रतिशत प्रति माह की समान ब्याज दर